मुरैना -- विधायक दिनेश गुर्जर ने नकली दवाओं की रोक-थाम को लेकर विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से लगाया था प्रश्न, लेकिन प्रशासन ने किया अनदेखा।

मुरैना-- विधानसभा सत्र जुलाई 2025 में मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से अमानक दवाओं एवं औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के उल्लंघन की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया था। किंतु आज दिनांक तक उस पर कोई सकारात्मक और आधिकारिक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। कांग्रेस के विधायकगण विधानसभा में जनहित में मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर आवाज उठाते हैं, लेकिन भाजपा सरकार द्वारा उसे अनदेखा कर दिया जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप छिंदवाड़ा में नकली दवाइयों से मासूम बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। इस विषय पर विधायक दिनेश गुर्जर ने पूर्व में ही सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखकर सरकार को सचेत किया था कि अवमानक/स्पूरियस दवाओं की बिक्री, औषधि निरीक्षकों की लापरवाही तथा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। दुर्भाग्यवश शासन ने इस गंभीर चेतावनी की अनदेखी की और जिसके चलते नन्हें बच्चों की जानें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। 
प्रदेश में न तो दवाओं के नियमित नमूने लिए जा रहे हैं और न ही नकली/अवमानक दवाओं पर न्यायालयीन कार्यवाही की जा रही है। अधिकारियों के भारी भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश सर्वाधिक नशीली दवाओं की बिक्री इंदौर, रीवा, ग्वालियर, सतना आदि जिलों में की जा रही है। अतः विभागीय अधिकारियों द्वारा अमानक / नशीली दवाओं की खुलेआम बिक्री किये जाने से आमजन के बीच भारी रोष व्याप्त है। इसके परिणामस्वरूप नकली और नशीली दवाओं की खुलेआम बिक्री जारी है, जिससे प्रदेश का युवा वर्ग नशे की चपेट में आकर अपने स्वास्थ्य और भविष्य दोनों को खतरे में डाल रहा है।
विधायक दिनेश गुर्जर ने प्रदेश की सरकार से पुनः मांग की है कि छिंदवाड़ा प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोरतम कार्यवाही की जाए, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहन जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाए, नकली एवं नशीली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के लिए तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं।

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