• एम. एजाज के कार्यकाल से नहीं हैं भाजपा को उम्मीदें
• खंडेलवाल के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद होना हैं बदलाव
• जनसंघ के जमाने से भाजपा से जुड़े बैग
जनसंघ के जमाने से उनका भाजपा से जुड़ाव रहा है। पेशे से वह वकील हैं। साथ में कुछ बड़े नेताओं से उनकी क़ुरबत भी है। पदों की दौड़ से दूर रहने का आलम यह है प्रदेश में पांचवां कार्यकाल आते आते भी उन्होंने किसी पद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाया, जबकि उनके बाद पार्टी में आए कई लोग उनसे आगे निकलकर पदों पर आसीन हो गए।
लगभग 40 वर्ष से आर.एस.एस. से जुड़ें हुए मुरैना से ताल्लुक रखने वाले एडवोकेट जाफर बैग को भाजपा मप्र अल्पसंख्यक मोर्चा का नया अध्यक्ष माना जा रहा है। जाफर बेग पूर्व उपाध्यक्ष मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, पूर्व उपाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा, पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अल्पसंख्यक मोर्चा, पूर्व जिला मंत्री भाजपा मुरैना, पूर्व एल्डरमैन नगर पालिका मुरैना भी रहें हैँ ! तेज तर्रार और कुशल वाक चातुर्य के चलते मोर्चा में नई ऊर्जा का संचार उनके आने से माना जा रहा है।
एजाज़ से आई शिथिलता
शारीरिक रूप से बीमार एम. एजाज खान के मोर्चा अध्यक्ष बनने से भाजपा को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ है। उनके कार्यकाल में मोर्चा की गतिविधियां लगभग शिथिल जैसी ही रही हैं। मोर्चा के बीजेपी ऑफिस स्थित कार्यालय से ज्यादा मप्र वक्फ बोर्ड हाजिरी देने वाले एजाज अपने कार्यकाल में अधिकांश समय बीमार ही रहे हैं। उनका नाम वक्फ बोर्ड के कई विवादों के साथ भी जुड़ा रहा है।
नए अध्यक्ष के साथ बदलेगी व्यवस्था
बीजेपी के नए प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आने के बाद पूरे प्रदेश में नई टीम बनाए जाने की चर्चा है। इसके चलते बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा में भी बदलाव होने की संभावना है। एजाज खान का कार्यकाल ऐसा नहीं रहा है कि उनके कार्यकाल में इजाफा किया जाए। उनके पद से हटाए जाने की एक वजह यह भी है कि वे पिछले अध्यक्ष वीडी शर्मा से जुड़े हुए हैं।
पार्टी को चाहिए नई ऊर्जा
ऐसे समय में जब भाजपा मुसलमानों को करीब लाने की कोशिश कर रही है, अल्पसंख्यक मोर्चा में नई ऊर्जा की जरूरत है। ऐसे में जाफर बैग के टीम में आने से बड़े बदलाव आएंगे। अभी तक मोर्चा में बड़वानी, उज्जैन और भोपाल से अध्यक्ष दिए जा रहे हैं। बैग के आने से ग्वालियर क्षेत्र और आसपास के कार्यकर्ताओं में नया जोश आने की संभावना है।

Post a Comment